Raksha Bandhan -The Bond of Love and Protection

साल का वह हिस्सा, जब हमारे टेलीविजन चैनल्स चॉकलेट और ग्रीटिंग कार्ड के विज्ञापनों से भरे होते हैं, अपने प्यार के बंधन का जश्न मनाने के लिए, सभी परिवारों में भाई-बहन आने वाले श्रावण मास की पूर्णिमा को लेकर सबसे ज़्यादा उत्साहित रहते हैं। जी हां, हम रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) की बात कर रहे हैं, जोकि इस साल 15 अगस्त को पड़ रहा है। रक्षा बंधन भाई-बहन के बंधन की पवित्रता और आनंद के उत्सव का एक पवित्र त्यौहार है। राखी का त्यौहार बहनों के बारे में है, इस दिन बहने भाईयों की मनोकामना और सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं जबकि भाई अपनी बहनों को सुरक्षा प्रदान करने का वचन देते हैं। यह उत्सव इतना अद्भुत होता है कि कैलेंडर में अपने आगमन के साथ भाई-बहनों का दिल खुशी और उत्साह से भर जाता है।

रक्षा बंधन का महत्व

हिंदू धर्म में रक्षाबंधन बड़े पैमाने पर महत्व रखता है। रक्षाबंधन दो शब्दों रक्षा और बंधन से मिलकर बना है, जिसमें रक्षा का आशय “संरक्षण” और बंधन का आशय “संबंध” होता है। यह त्यौहार भाई-बहन के बीच मौजूद पवित्र बंधन के सम्मान को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन, बहने अपने-अपने भाईयों की कलाई में ‘राखी’ बांधती हैं और राखी बांधते समय, वह अपने भाई के जीवन में सफलता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। यह भाई के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करने का एक पारंपरिक तरीका है। सदियों से, यह माना जाता रहा है कि राखी एक कवच के रूप में काम करती है जिसका अर्थ है कि राखी एक रक्षात्मक तंत्र के रूप में कार्य करती है जो एक बहन के आशीर्वाद से संचालित होकर उसके भाई को सभी बाधाओं से सुरक्षित रखती है।

क्या इस रिश्ते को दूरियाँ प्रभावित करती है?

परंपरागत रूप से, राखी जोकि एक पवित्र धागा होता है, इसको इस दिन भाई की कलाई पर बांधा जाता है। अगर भौगोलिक दृष्टि से भाई-बहन अलग-अलग राज्यों, शहरों या देशों में रह रहे हैं तो, यह दिन दूरियों को ख़त्म करने या मिटाने का खास दिन होता है। फोन की घंटी जब एक अलग झनकार के साथ बजती है, जब दरवाजे की घंटी दिल की धड़कन को एक अलग ही गति प्रदान करती है, अप्रत्याशित उपहार या अचरज में डाल देने वाले मेहमानों का आगमन आदि, भाई और बहन के प्यार को इस दिन पुनः पुष्टि करती है। इस शाश्वत प्रेम को मनाने के लिए विवाहित बहनें अपने घरों पर इस दिन अपने भाइयों की इस विशेष यात्रा से अत्यधिक उत्साहित रहती हैं।

रक्षाबंधन त्यौहार को मनाने का कारण

रक्षा बंधन का त्यौहार भाइयों और बहनों के मध्य आपसी कर्तव्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह अवसर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में उल्लास करने का दिन है, इसमें कोई जरूरी नहीं कि यह रिश्ता जैविक हो। रक्षाबंधन दूर के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या चचेरे भाइयों से संबंधित भाई-बहन के बीच भी मनाया जाता है।

रक्षा बंधन से सम्बंधित कुछ अनजाने तथ्य;

द्रौपदी ने एक बार भगवान कृष्ण को राखी बाँधी:

बहुत से लोग इस तथ्य के पीछे की पूरी कहानी नहीं जानते हैं, इस कहानी के अनुसार, भगवान कृष्ण ने एक बार पतंग उड़ाते समय अपना हाथ काट लिया, यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी से एक कपड़े का टुकड़ा निकाला और कृष्ण को बांध दिया, जिसके बदले में भगवान कृष्ण ने किसी भी हालत में द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया। बाद में भगवान कृष्ण ने चीर हरण के दौरान द्रौपदी की रक्षा की।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के सम्बन्ध में:

कम ही लोग जानते हैं कि रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी का इस्तेमाल सामाजिक एकता को बढ़ाने के लिए उपयोग किया थाप्रसिद्ध कवि और स्वतंत्रता सेनानी रवींद्रनाथ टैगोर जी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच के बंधन को मजबूत करने के लिए राखी के रिवाज का सुझाव दिया था।

आज भी यह त्यौहार देश में धर्म की सीमा से परे है।

इंद्राणी द्वारा भगवान इंद्र को राखी बांधने का प्रसंग:

रक्षा बंधन का त्यौहार मात्र भाई-बहन से नहीं जुड़ा था। शास्त्रों में लिखित, एक कार्यक्रम में इंद्राणी अर्थात भगवान इंद्र की पत्नी ने भगवान इंद्र की कलाई पर एक धागा बांधा। राक्षसों से लड़ने जाने से पहले इन्द्र की कलाई पर इंद्राणी ने यह धागा बांधा। यह लोकप्रिय धारणा का खंडन करता है कि मात्र बहनें ही भाइयों को रक्षा के वचन के बदले में राखी बांधती हैं, इस संदर्भ को बाद में हटाकर मात्र भाई बहनों के सन्दर्भ तक इसे सीमित कर दिया गया।

नेपाल, मॉरीशस, अमेरिका, श्रीलंका और यूएई में राखी:

रक्षाबंधन भारत से जुड़ा एक त्यौहार है, लेकिन इसको हम भारतीय लोगों की सोच से कहीं अधिक, व्यापक रूप से मनाया जाता है। रक्षाबंधन को नेपाल, मॉरीशस, अमेरिका, श्रीलंका और यूएई में रहने वाले विभिन्न और गैर-भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। इस उत्सव को भाइयों और बहनों के बीच एक सार्वभौमिक बंधन के प्रतिनिधित्व करने की अपनी प्रकृति के कारण व्यापक स्वीकृति भी मिलती है।

हर साल रक्षाबंधन के त्योहार का सभी बहनों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन भाई जहां कहीं भी हो, वे अपनी बहन से मिलने और उनसे राखी बंधवाने उनके पास पहुंच ही जाते हैं। ऐसे में तो इस त्योहार का इंतज़ार महीनों पहले से ही शुरू हो जाता है। कई दिनों पहले से बहन को ससुराल से मायके लाने की तारीख निश्चित कर ली जाती है।

बच्चे भी राखी के त्योहार के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं। यह दिन भाई-बहन के बीच प्रेम के अटूट रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, उन्हें मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा करती हैं और अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। राखी बांधने से पहले उनकी आरती उतारने के लिए सुंदर सी थाली सजाती हैं। भाई भी राखी बंधवाने के बाद अपनी बहनों को वचन देने के साथ ही कोई तोहफा व लिफाफा भी देते हैं। इसी तरह हंसी-ठिठोली के बीच परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर राखी के त्योहार को मनाते हैं।

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